अपनी सोच सकारात्मक कैसे रखें?

 


अपनी सोच सकारात्मक कैसे रखें?
जब व्यक्ति को जीवन में असफलता का सामना करना पड़ता है तो उसके मन में यही ख्याल आता है कि मैं यह नहीं कर सकता क्योंकि मेरे भाग्य में यह नहीं है। यही उसकी असफलता का मुख्य कारण है। यह सोच ही व्यक्ति को नकारात्मकता का शिकार बनाती है और वह अपनी असफलता का दोष दूसरे पर डालकर अपने आपको सही बताने का प्रयास करता है। ऐसा करके व्यक्ति अन्य लोगों से संबंध बिगाड़ लेता है और खुद के दुर्भाग्य को अंजाने में न्यौता दे बैठता है। असफलता को अनुभव के रूप में लेने के बजाय व्यक्ति उदास हो जाता है और सफलता की स्थिति में व्यक्ति उतना ही उत्साहित और स्वयं पर गौरवांवित महसूस करता है। दोनों ही स्तिथियों में वह ईश्वर के प्रति समर्पण नहीं करता और उनका धन्यवाद करना भी भूल जाता है। जीवन में जो भी सफलता और असफलता हमें प्राप्त होती है उसके पीछे हमारी क्षमता और आत्मविश्वास के साथ हमारे संचित कर्म भी होते हैं। हमारे संचित पुण्य कर्मों के कारण हमारे थोड़े से प्रयास ही सफलता में परिवर्तित होते हैं पर वहीं जो हमारे बुरे कर्म होते हैं वह असफलता को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हम भूल जाते हैं कि सफलता और विफलता कुछ क्षण के लिए आती है जो हमें कुछ न कुछ अनुभव देकर जाती है। हमारा परिश्रम और हमारी सकारात्मक सोच हमें अपनी खामियों को समझने में मदद करती है, जिसके बाद हम उनका सुधारकर अपना भविष्य संवार सकते हैं। इस सकारात्मक भाव और लक्ष्य पर एकाग्रता लाने के लिए ही शिवयोग की साधनाओं को हमें अपने दैनिक जीवन में अपनाना चाहिए। शिवयोग साधना हमारे संचित कर्मों का क्षय करते हुए हमें मोक्ष की प्राप्ति की ओर ले जाती है और दूसरी ओर साधक की सफलता का मार्ग प्रशस्त कर उसको एक सुंदर और संतुष्ट भौतिक जीवन प्रदान करती है।

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