आत्मज्ञान की अवस्था में क्या होता है?


 

आत्मज्ञान की अवस्था में क्या होता है? 

ईश्वर ने हम सबको इस संसार में एक उद्देश्य की पूर्ति के लिए भेजा है। उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही व्यक्ति को सबसे पहले अपने वास्तविक स्वरूप को जानना बहुत जरूरी होता है। क्योंकि जब तक हम अपने वास्तविक स्वरूप को नहीं जानते हैं तब तक हम सब कर्म के बंधन में ही बंधे रहते हैं। जब हम ध्यान, साधना और अध्यात्म के मार्ग को चुन लेते हैं, तब हमें पता चलता है कि वास्तव में मैं कौन हूं? इसे हम आत्मज्ञान की अवस्था भी कहते हैं। जब हम उस परमसत्य को जान जाते हैं कि हम तो वास्तव में उस परमपिता परमेश्वर का ही अंश हैं जो निर्गुण निरंकार है। तब हमारे अंदर से काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार इत्यादि सभी विकार समाप्त हो जाते हैं और सृष्टि के गूढ़ रहस्यों को जान पाते हैं। इस आत्म-साक्षात्कार को प्राप्त करने की प्रक्रिया बहुत ही सरल है पर इसके लिए हमें सही मार्गदर्शन या सही गुरु की आवश्यकता होती है।

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