संतुष्ट लोग ही सुखी क्यों हैं?

 


संतुष्ट लोग ही सुखी क्यों हैं?

जीवन से जुड़े कई तथ्यों पर गहनता से अध्ययन करके सफल जीवन का मार्ग शिवयोग में बताया गया है। अध्यात्मिक मनुुष्य बुरे वक्त में भी एक दूसरे की मदद करता है। कई बार दूसरों की मदद करने के बाद खुद को नुकसान उठाना पड़ सकता है। किस प्रकार के लोगों की मदद करनी चाहिए और किस तरह के लोगों से दूरी बनाकर रखने में ही भलाई है - इसका ज्ञान शिवयोगी को जरूर होना चाहिए।
मूर्खाशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च।
दुःखिते सम्प्रयोगेण पंडितोऽप्यवसीदति।
इस श्लोक में मूर्ख लोगों से दूर रहने की बात कही गई है। मूर्ख व्यक्ति किसी उपदेश या ज्ञान को नहीं समझता इसलिए ऐसे लोगों के साथ समय व्यर्थ करना ठीक नहीं है। मूर्ख, बुद्धिहीन व्यक्ति को समझाने में मानसिक तनाव झेलना पड़ सकता है, इसलिए ऐसे लोगों से दूर रहना चाहिए। किसी भी मनुष्य की समझदारी उसके चरित्र पर निर्भर करती है। जस व्यक्ति का चरित्र व विचार ठीक न हो उसके करीब नहीं जाना चाहिए। क्योंकि चरित्रहीन लोगों की मदद करने से खुद के नुकसान की ज्यादा संभावना रहती है। इसी लिए जीवन में हमेशा मूर्ख व्यक्ति से संबंध खत्म कर आगे बढ़ जाना चाहिए।

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