सफलता के लिए 3 मूलमंत्र क्या हैं?


 सफलता के लिए 3 मूलमंत्र क्या हैं?


व्यक्ति सांसारिक जीवन में हो या फिर आध्यात्मिक जीवन में, उसकी एक ही कल्पना या एक ही लक्ष्य होता है कि वह अपने इस जीवन में सफल हो जाए। जिसके लिए वह कर्म भी करता है और ईश्वर से प्रार्थना भी करता है। लेकिन इसके बाद भी उसके जीवन में सकारात्मक बदलाव नहीं आते हैं। जिससे व्यक्ति का ईश्वर से विश्वास उठने लगता है और वह कभी कभी अपने आपको नास्तिक दिखाने लगता है। ऐसे में हमें एक बात नहीं भूलनी चाहिए कि ईश्वर भाषा नहीं भाव को समझता है। यदि आपकी सफलता के पीछे दूसरों का हित जुड़ा है तो निश्चित ही उस काम में आपको सफलता प्राप्त होगी। शिवयोग में बताया गया है कि सफलता का मार्ग साधना, संकीर्तन और निष्काम सेवा से होकर गुजरता है। यदि इन तीनों में किसी एक की भी कमी है तो हमें लाख प्रयास के बाद भी असफलता ही हाथ लगेगी। इस लिए व्यक्ति को साधना, संकीर्तन और निष्काम सेवा करनी चाहिए, ताकि जीवन में आपको स्थायी सफलता और सुन्दर स्वास्थ्य दोनों की प्राप्ति हो सके।

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